#Kavita by Sandeep Saras

🔴जीवन🔴

मुखर वेदना को सहेजकर  जीना भी कैसा जीना है,

जीवन यदि जीवन्त न हो तो ,उस जीवन से मरण श्रेष्ठ है।।

बाधाओं से सम्मुख कैसे ,नतमस्तक हो झुक जायेंगे।

थककर चूर हुए भी तो क्या ,हार मानकर रुक जायेंगे।

पथ के कण्टक पुष्प बनाना ,पौरुष का परिचय होता है,

पथ को जो गौरव दे पाये ,मानूंगा वह चरण श्रेष्ठ है।।1।।

जनहित  जगहित मानवता से ,बढ़कर कोई धर्म नहीं है।

भूंखे  को  रोटी  देने से, बेहतर  कोई कर्म नहीं है।

व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व अमर है ,हम बदलेंगे युग बदलेगा,

जीवन को अमरत्व सौंप दे ,ऐसा शुभ आचरण श्रेष्ठ है।।2।।

मंजिल से पहले रुक जाना ,यह यात्री का काम नहीं है।

जीवन पथ पर चलना जीवन ,पल भर भी विश्राम नहीं है।

ठहरा जल सडांध देता है बहते रहना ही जीवन है,

हर क्षण जीवनगान सुनाती सरिता काअनुसरण श्रेष्ठ है।।3।।

संदीप सरस”~~ 9450382515

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