#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

तुम्हारे प्यार मे एक एहसास लिख रहा हुं

हरदम तुम्हे ही दिल के पास लिख रहा हुं

….

बसंती ब्यार मे

महकते गुलजार मे

एक तुम ही दिखती हो

मुझे इस पुरे संसार मे

….

आंखो मे आपकी सागर की गहराई

आपके नूरी चेहरे से दिखती है खूदाई

आपकी मुस्कान से रूह को मिलता है शुकुन

आपकी बातो मे है वफा और सच्चाई

….

आपको देखकर दिन अच्छा जाता है

आपसे बाते कर दिल को करार आता है

एक एहसास लिख रहा हुं कविता मे

कि तुमपे मुझे बहुत प्यार आता है

तुमसे मिलने के बहाने डूंडते रहता हुं

तुम्हारे बारे मे खूद से पुछते रहता हुं

तुम तो बसी हो मेरी रूह मे,आत्मा मे

और मै पागल तुम्हे बाहर डूंडते रहता हुं….

….

कभी तो मिलोगी तुम हम हाले दिल कहेंगे

देख लेना एक दिन तुम्हे अपना बना के रहेंगे

ये मेरा ईश्क है तुम्हे एहसास होगा जरूर

थोडा जल्दी आना हम आपके इंतजार मे रहेंगे……

संजय अश्क बालाघाटी

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