#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

पंगे हो गये

धर्म को लेकर देश मे दंगे हो गये

फैशन के नाम पर लोग नंगे हो गये।

करोडो जनता का खून चूस चूसकर

अपने यहां के नेता भले-चंगे हो गये।

वो लुटे देश तो कोई फर्क नही पडता

हमने मांगा हक तो भीखमंगे हो गये।

कुछ तो सुधार अपने बरताव मे करो

कब तक कहोगे कि लोग बेढंगे हो गये।

मंहगाई के दौर मे ईमान बीक जाते है

जो थे सत्यवादी अब वो लफंगे हो गये।

झुठो की दुनिया मे सच बोलने की लत

हाय रब्बा कई लोगो से पंगे हो गये।

संजय अश्क,

पुलपुट्टा,बालाघाट – 9753633830

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