#Kavita by Sanjay Kumar Avinash

नक्सली कौन
हाँ, मैं नक्सली हूँ
दर्ज करो मेरे नाम
गुनाह
सैकडों में
हजारों में
करोडों में
हथौडी संग मांझी
कुदाल संग सदा
चाकू संग चमार
मुमताज जैसी फाल्गुनी।
पहाडों को चीर दिया
रेलों को उडा दिया
थानेदारो से निपट लिया
नेताओं को समझ लिया।
मेरी लाश नहीं जलती
बच्चे स्कूल नहीं पढते
मांएं अस्पताल नहीं जाती।
दर्ज करो मेरे नाम गुनाह
सुगिया
बुधिया
छविलिया
शहरी ने लूटा
थानेदारो ने झडपा
जेलों में बच्चा जन्मा।
अपना भी कबूल करो
इन सभी में तुम हो
चारों स्तंभ तुम्हारा
मीडिया ठीक कुतिया
सफेदपोश दानवी सोच
न्यायालय क्राइम विद्यालय
जिला मुख्यालय
सब फरेब।
मेरी भी मौजूदगी कम नहीं
हवाओं में बू बनकर
बेटियों की पर्स में रूपैये
शराबों में खून।
दर्ज करो मेरे नाम गुनाह
करो, करते रहो
हथियारों का नाम
लिखो, लिखो न
खुरपी
हंसुआ
हथोडी
दुधमुंहे बच्चों की जान……
और क्या?

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