#Kavita by Satyam Yadav

मुझे अब दोस्त व दुश्मन पे भरोसा न रहा

मेरी नज़रों में कोई पीर या ओझा न रहा

जो भी आया वही नापाक इरादे ले कर

काम आयेगा कोई मुझको ये धोखा न रहा

मन में आता है कि दुनिया से किनारा कर लूँ

मेरा अपना है जिसे दिल ने ये सोचा न रहा

वक्ते- रुख़सत को तो आना था सो वो आ ही गया

चाहे रो-रो के उसे जितना भी रोका, न रहा

मैं भी अब बन के फ़कीर आज चला घर से

तू भी ख़ुश हो ले ज़माने मेरा बोझा न रहा.

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