#Kavita by Shabdh Mashiha

आज लिखूं मैं प्रेम गीत, यदि आप करो श्रृंगार प्रिये!

आज वरूँ मैं पुनः तुम्हे, रखो काजल की धार प्रिये !

 

मदिर पवन है वर्षा भीनी

धरती पर  हैं  बादर छाये

नभ भी मिलने को आतुर

मान भी जाओ आज प्रिये !

 

आज वरूँ मैं पुनः तुम्हे, रखो काजल की धार प्रिये !

 

मुंह धोकर उजलाए पादप

नव कलियों ने मुख खोले

मदन करे गुंजार बहु सुन

गाओ प्रेम मल्हार प्रिये !

 

आज वरूँ मैं पुनः तुम्हे, रखो काजल की धार प्रिये !

 

झूमें तरु धरा प्रफुल्लित

नयन नवांकुरों ने खोले

त्यागो आज लाज घूंघट

आओ नयन मिलाएं प्रिये !

 

आज वरूँ मैं पुनः तुम्हे, रखो काजल की धार प्रिये !

 

साध हो पूर्ण मनोवांछित ये

लिपटो लता सरीखी तुम

लौटा लाओ मधुर समृतियाँ

कर विनय स्वीकार प्रिये !

 

आज वरूँ मैं पुनः तुम्हे, रखो काजल की धार प्रिये !

 

शब्द मसीहा

Leave a Reply

Your email address will not be published.