#Kavita by Shambhavi Mishra

महाभुजंगप्रयात सवैया

122 122 122 122,122 122 122 122

विषय -सवेरा,भोर

नई भोर जागो सिया राम बोलो,

गई रात काली नया हैं सवेरा।

उठो जाग जाओ निराशा तजो तो,

भरो नैन आशा बसाओ बसेरा।।

सभी राह देखो खुले सामने हैं,

चुनो राह नेकी यही धर्म तेरा।

हमारी धरा देश झूमें ख़ुशी से,

रहे प्रेम होवे न तेरा न मेरा।।

शाम्भवी मिश्रा

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