#Kavita by Shambhu amlvasi

“मेरी जिज्ञासा कहती है”

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प्यार मे दिल ये रोया है
रात को जगकर सोया है
मेरी जिज्ञासा है कहती,तू क्यों पागल होया है ।
प्यार में दिल ये रोया है रात को जागकर सोया है।

सपने सारे टूट गए
अपने सारे रूठ गए
दिल को कुछ तो होया है
दिल को कुछ तो होया है

मुझको भी मालुम नही
उसको भी मालुम नही
प्यार ये कैसा होता है.. प्यार ये कैसा होता है

आंसू गिर रहे धरा-पे
दिल को कुछ तो होया है
आंसू गिर रहे धरा-पर
दिल को कुछ तो होया है

प्यार में दिल ये रोया है,रात को जागकर सोया है।

कॉलेज के दिन सहकर्मी बन
तुम बेठ गए मेरे आगे
कॉलेज के दिन सहकर्मी बन
तुम बेठ गए मेरे आगे

तब मन ये उछला था बे-मन
मन प्रतिफल थे जागे।

जब से तुमको देखा है
आँखे मेरी चार हुई
मेरे जीने की जिज्ञासा
अब तो तुम आधार हुई

मेरे जीने की जिज्ञासा ,अब तुम आधार हुई।

अमर-अमर हो जायेगा
जहाँ -कही भी जायेगा
प्रेम गीत ही गायेगा
कैसे कहदू …….तुम-बिन
अमर नही रह पायेगा
आँख से यादो का आंसू
बहता-बहता जायेगा
अमर नही रह पायेगा
अमर नही रह पायेगा

प्यार में दिल ये रोया है
रात को जागकर सोया है

मेरी जिज्ञासा कहती है.. तू क्यों पागल होया है।

शम्भू अमलवासी “अमर”

9953040209

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