#Kavita by Shambhu Nath

बजाय रहेव बसिया ॥
चराय रहेव् गइया ॥
दही मोरी खाय गयो ॥
यशुदा के कँधैया ॥
दही मोरी खायो ॥
मटकी मोरी फ़ोड़ेव ॥
सगरी जगह ॥
बिथराय गयो दहिया ॥ (दइया)
दही मोरी खाय गयो ॥
यशुदा के कँधैया ॥
मइया यशोदा मानय बतिया ॥
उनका पता बा कान्हा कय अदतिया ॥
रोज़ रोज़ रोके आय मोरी रहिया ॥
बजाय रहेव बसिया ॥
चराय रहेव् गइया ॥
दही मोरी खाय गयो ॥
यशुदा के कँधैया ॥
अपनी बासुरिया कय ॥
जादू सुनावै ॥
सोवतीरात म हमका ॥
बोलावय ॥
पहिन लीन गटई म ॥
पाँव पैजनिया ॥

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