#Kavita by Shambhu Nath

देख तुम्हारी सुरति को ॥
ख्वाबो में मै खोता हूँ ॥
उछल कूद मचा करके ॥
अम्बर को भी छूता हूँ ॥
आँख तुम्हारी इश्क सिखाया ॥
होठ सिखाया हँसना ॥
हुस्न तुम्हारा देख के जानू ॥
भूल गया हूँ चलना ॥
जैसे तूने किया इशारा ॥
वैसे कश्ती में कूदा हूँ ॥
देख तुम्हारी सुरति को ॥
ख्वाबो में मै खोता हूँ ॥
उछल कूद मचा करके ॥
अम्बर को भी छूता हूँ ॥

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