#Kavita by Shambhu Nath

मै सूरज की वही हूँ किरणे ..
जो धरती को चमन बनाती हूँ।।
सोना चांदी हीरे मोती ..
धरती पर उपजाती हूँ।।
फूलो में महक बिखराती हूँ।।
चिडियों को गीत सुनाती हूँ।;.
मै नदियों की चंचल धारा हूँ।/.
जो कल कल कर लहराती हूँ।।
हर मौसम में प्रक्रित को।।
अपने हाथो से सजाती हूँ।।
उन सोये हुये अंकुर के अन्दर।
बीज की ज्योति जलाती हूँ।।
मै सूरज की वही हूँ किरणे ..
जो धरती को चमन बनाती हूँ।।

322 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *