#Kavita by Shambhu Nath

इस धरा का सौँदर्य सुन्दर ॥
स्वर्ग से भी प्यारा है ॥
जीव जंतु निर्जीव सभी को ॥
धरती का ही सहारा है ॥
इसी धरती पर गंगा यमुना ॥
इसी पर चारो धाम है ॥
पर्वत राज हिमालय हँसता ॥
यही अमर नाथ कैलाश है ॥
हरी भरी प्रकृति छटा का ॥
रूप सुहाना नयारा है ॥
धरणी पर हीरे मोती उगते ॥
खिलते खुशियो के फूल ॥
प्रबल प्रवाह प्रभाबित होती ॥
ख़ुशी रहती मशगूल ॥
गगन से चाँद सूर्य निहारे ॥
देख के हँसता तारा है ॥

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