#Kavita by Shambhu Nath

तू ही मेरा हूर है
तू ही मेरा नूर है ॥
मेरे जिगर से तू ॥
नहीं दूर है ॥
तेरे कारण रोटी ॥
न खाती ॥
रोटी खाती तो ॥
ओकी आती ॥
नटखट लल्ला तू ॥
बड़ा बशहूर है ॥
तेरे कारण नींद ॥
न आती ॥
सब्जी दाल ॥
हमको तिताती ॥
रिश्तो का कैसा ॥
अनोखा वसूल है ॥
पैदा जब तू ॥
खुशियाँ आयी ॥
तेरी दादी ने ॥
अशरफी लुटायी ॥
भविष्य का ॥
रचयिता तू ॥
मेरा कोहिनूर है ॥

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