kavita by Shambhu Nath

सुबह सुबह का नया सवेरा॥

रवि किरण बिखराया है॥

कलियाँ फ़िर से जाग गयी

शुभ प्रभात जो आया है॥

पशु पक्षी का कलरव सुन कर॥

पुष्पलता मुस्काई है॥

ममता भरी बोली चिडियों की॥

आँगन से टकराई है॥

गोलू ने मोलू को जाके ॥

विस्तर से उठाया है॥

कलियाँ फ़िर से जाग गयी
शुभ प्रभात जो आया है॥

हर हर पवन हिलोरे।

बागो में उधम मचाई है॥

माली दौडे फूल चुगन को॥

कैसे उसकी चतुराई है॥

सुबह सुबह फ़िर से भानु॥

बच्चो को हसाया है…

कलियाँ फ़िर से जाग गयी
शुभ प्रभात जो आया है॥

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