#Kavita by SHEO MURTI TRIPATHI

गीत
गीत खो गये साज़ सो गया अधरों का उल्लास खो गया|
तुम रूठे स जग रूठा निर्मोही मधुमास हो गया|

सूने लगते महल अटारी सूना घर आँगन लगता है,
चिंगारी बन गयी फुहारें मुरझाया सावन लगता है
अपनों का निष्ठुर् हो जाना जीवन मे संत्रास बो गया|

मन बहलाने रात चाँदनी अब भी छत पर आ जाती है
ढूंढ-ढूंढ कर व्यथित हिर्दय से उल्‍टे पावं चली जाती है
दस्तक देकर कौन जगाये जीने का अहसास खो गया|

बीता कल चंद्रेश सुहाना भूल चुके कुछ याद  नही है
टीस रहे  हैं घाव हिर्दय के होंठों पर फरियाद नही है

दर्द हुआ आगंतुक जब से खुशियों को बनवास हो गया|
द्वारा–शिवमूर्ति त्रिपाठी [चंद्रेश]

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