kavita by Shiva Kumar Pandit

वसंत
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फूल महका वसंत,
बहका तन मन संत,
कोयल कूक समान,
निशा का दुखद अंत |

लिये परिमल समीर ,
छुये वनिता शरीर ,
खिले तब मन सरोज,
बहे मधु अमृत नीर |

ललित मौसम बहार,
कलित सुमन की हार,
पहन ललना ललाम,
मधुप लायें कहार |

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