#Kavita by Shiva Kumar Pandit

बोतलें सब खाली हुए
फिर कोई भरा नहीं
एक जाम और दे शाकी
नशा अभी चढ़ा नहीं

बहुत पढ़े होंगे किताब
दुनियां के रंजोगम की
मेरे मन के पन्नों को
शायद तू पढ़ा नहीं

दोस्ती ने मारा मुझे
रंजिश में हिम्मत कहां
जख्म जो अपनों ने दिया
अवसर ने भरा नहीं

अंदाज मत लगाना तू
आवरण को देखकर
कपड़ों में सजा है जो
वह कोई बड़ा नहीं
——-शिव कुमार पंडित
कोलाकुसमा, धनबाद

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