#Kavita by Shiva Kumar Pandit

चले आये देने आशीर्वाद
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करते हो तुम
बच्चे अनाथ
खून से सने
गंदें तेरे हाथ
क्षण  में मच गया
आर्तनाद
शर्म भी न आया
चले आये देने
आशीर्वाद

बटोरते
रुपये अगाध
अपनी जिंदगी
लिये हो साध
तुम्हें क्या पता
तुम्हारे कर्मों से
कौन मरा
कौन आबाद
शर्म भी न आया
चले आये देने
आशीर्वाद

विकास हेतु
बनती योजनायें
विकास से ज्यादा
आती आपदायें
कमीशन तेरे बन गये
और हम करते रहे विवाद
शर्म भी न आया
चले आये देने
आशीर्वाद
—–शिव कुमार पंडित
कोलाकुसमा

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