#Kavita by Shrawan Sahu

कश्मीर पीड़ा-

पुकारती अब मां भारती

आये बलयोद्धा फिर रण में।

कुटुम्ब छोड़ भव नाता तोड़

स्वमातृभुमि की समर्पण में।

कर्णधार बनें ब्रम्हवार बनें

धरे शोणित तक अर्पण में।

हर दें संताप, भर दें नवताप

शान-गान जन-गण-मन में।

हूं नित बिकल,समा दे बल

भरें ओज पुनः कण-कण में।

कर धार धरे शत्रुसंहार करे

करे भंग गर्दन क्षण-क्षण में।

बचा कश्मीर मेरी हरें पीर

हुंकार भरे जिनके प्रण में।

बढ़े अत्याचार मुझे लें उबार

दिखुं पूर्ववत् मैं दर्पण में।

रचना- श्रवण साहू ‘दुलरवा’

ग्राम- बरगा , जिला-बेमेतरा

08085104647

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