#Kavita by shyam snehi

ये बताता रहा
है बजट
देश प्रदेश का
हलकान
परेशान
किसान
बूढ़ा खूसट
और जवान
कितना खायेंगे
कितना खिलाएंगे
औ’ कितना
बचाएंगे
साथ ही- लोगों को
क्या समझायेंगे –
बजट
लागू होने के
दिन से ही
भोला-भाला
बुद्धू बनकर
बुद्धू खूब बनाएंगे
माल खाएंगे-खिलाएंगे
नहीं मिलेगा तो-
चिल्लायेंगे
वैमनस्यता के बीज
पनपा-पनपा
सिचेंगे-
दीवार भेदभाव के
खींचेंगे
गुल खिलाएंगे
शगूफों के
धूल उड़ाएंगे
हर साल
फिर से –
नया बजट बनाएंगे
चारवाक का सिद्धांत
“जबतक जियो –
सुख से जीयो
कर्जा लेकर
घी भी पीयो” की
नीति वाक्य को
नहीं कभी
झुठलायेंगे।
नहीं झुठलाने की
मजबूरी भी
कल इसी
पटल पे
बेबाकी से
बतलायेंगे।

-; बेबाक बिहारी “श्याम”

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