#Kavita by Sudha Mishra

यहाँ  तो इंसान लापता है

हजारों लोग बेघर ,लाचार पड़े हैं

नेता बैनरों में भूख मिटा रहे हैं

कुछ नेता अब तक बेहोश पड़े हैं

आधी आबादी भूख से त्राहिमाम है

यहाँ मदद भी सरकारी फाइलों में

अटकी पड़ी है

औरतें सुहाग के दाह-_संस्कार को

आँचल फैलाए भीख माँग रही हैं

गंगा के कोहराम में घर-बार डूबा है

प्रशासन अभी लाचार पड़ी है

भूखों की किसको सुध पड़ी है

हर रोटी पर मार-काट मची है

देश कितनी तरक्की कर गया है

बस गरीबी का कोई इलाज नहीं है

दौरे पर दौरे होते हैं बस यहाँ

किसकी कब भूख मिटी है

जाओ दौरा कर आओ वहाँ भी जरा

जहाँ हर दाने पर लूट मची है

जान जोखिम का दौर यहाँ है

वहाँ एसी में योजना फँसी है

हे कृष्ण तुम ही करो अब उपाय कोई

यहाँ तो इंसान अब लापता है ।

*सुधा मिश्रा ***

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