#Kavita by Sudhanshu Dubey

मेरी प्यारी बुढ़िया दादी

अजब है दादी फितरत तेरी

गजब है दादी फ़ितूर तेरी

अब इससे ज्यादा बोलु मैं क्या?

जीवन की तस्दीक भी तुझसे और जीने का सलीका भी तुझसे

नन्ही निगाहों से देख तो नहीं पाया लेकिन साँसों की खुश्बू और बड़पन से महसूस जरूर किया है मैंने,

अनसुने पलों से कही अधिक ,

अविनाश स्वरुप अदृश्य यादो से पाला है मुझे,

थामाँ है अपने आँचल से,

सायद एक माँ से कही ऊपर होके,

ममता के धागों से मोतियों की तरह पिरोया है मेरे जीवन को तूने,

कंचन के यन्त्र से,

संजय के तंत्र से ,संतोष रख सर्वत्र बनाया है मुझे,

कोटि कोटि नमन करता हु तुझे,

कोटि कोटि प्रणाम करता हु तुझे,

मेरी प्यारी बुढ़िया दादी

अजब है दादी  फितरत तेरी,

गजब है दादी फितूर तेरी,

न पूछा हाल कभी मैंने तेरा,

न पूछने की सोच सका,

लेकिन हर बार सौहार्द से है,

तूने चूमा माथा मेरा,

विगमंन की छवियों की तरह,

रौशनी डाल के स्पर्श किया नादानियों की छवियां मेरी,

हर ख़ुशी दी मुझे जैसे कोई अविस्मरणीय पल की तरह,

गंगा,यमुना से कही शीतल थी

तेरी गोद, तेरा वो प्यार,तेरा बड़पन,

रहे हमेशा तेरा साथ,

कुछ ऐसा हो ,

तू रहे हमेशा मेरे पास ,

तू रहे हमेशा मेरे पास…..तू रहे हमेशा मेरे पास……😢😢😢😢

मेरी प्यारी बुढ़िया दादी।

One thought on “#Kavita by Sudhanshu Dubey

  • April 5, 2017 at 9:16 am
    Permalink

    Nice line’s
    Best of luck my brother

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