#Kavita by surendra pratap

संकट के बादल हैं छाए
गम की बारिश ना हो जाए।
कोई रास्ता है नहीं
कोई जाए तो कहाँ जाए ?

हर तरफ हाहाकार
अत्याचार ही अत्याचार ।
बढ़ता जा रहा है
हर जगह अहंकार ।

इस दुनिया में सुकून से
कोई कैसे जी पाए ??

कोई रास्ता है नहीं ……..।

पराये तो पराये थे
अपने भी अपने ना रहे ।
कोई अपने मन की बात
कहे तो किससे कहे ??

इस अजनबी दुनिया में
कोई किसको अपना बनाए ??

कोई रास्ता है नहीं ………..।
…………..
-सुरेन्द्र प्रताप

ग्राम -ऐनवा, पोस्ट -झकही
गोरखपुर
273212

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