#Kavita by Sushila Joshi

#  परिचय #

जग पूछ रहा मेरा परिचय

छल छद्मि मादक बैनो से

मुझमे भौंडापन ढूंढ रहा

उत्सुक विस्फारित नैनो से ।

ऊषा की हु मुस्काहट

पंछी स्वर की मैं लहरी हूँ

स्वर्णिम रंग से विस्तारित

और आसमान से गहरी हूँ ।

धरती पर पसरा प्रकाश

मैं नील गगन की विस्तृतता

मैं इंद्रधुष की अंगड़ाई

जन जन मन हूँ आकुलता ।

बालक की हूँ शब्द शक्ति

और नेह प्यास की हूँ पह्चान

जीवन की मै सार भक्ति हूँ

झूठ कपट से हूं अंजान  ।

विश्व प्रेम का सागर हूँ

मैं मानव मन का आकर्षण

संस्कार की निर्माता

मैं दानव तन का संघर्षण ।

मैं हूँ चेतनता मानव तन की

उर धड़कन में है मेरा वास

भाव शक्ति मेरा स्वरूप है

दिग भरमाता मेरा   हास् ।

जगसृष्टा की रचना हूँ मैं

साकार भाव की जननी हूँ

मानव संरचना की कर्त्री

आकार विश्व की करनी हूँ ।

कवि की मधुर कल्पना हूँ मै

मानव की पहली सन्तान

ब्रम्हा की मैं आद्या शक्ति हूँ

और गायक की पहली तान ।

मन में उमड़ी श्रद्धा हूँ मैं

घर घर में फैला विश्वास

रेशम के धागों से निर्मित

छद्मो से मैला आकाश ।

जग जननी हूँ उर्वरा शक्ति

मैं कामदेव की पालक  हूँ

यम नियमो में बंधे विश्व के

आकर्षण की  चातक  हूँ ।

आगे भी

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