#Kavita by uday Shankar Chaudhri

कण-कण माटी ऋणी भगत की

ऋणी है ये आजाद की

ऋणी राजगुरु बटुकेश्वर की

ऋणी है वीर सुभाष की

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इस  माटी को वीरों  ने  निज

देकर  लहु  सजाया था

इस माटी की रक्षा में

हंस कर प्राण लुटाया था

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राणा शिवा गुरुगोविन्द सिंह

इस बगिया के माली थे

दिल में हिन्दस्तान बसा था

करते इसकी रखवाली थे

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बलिदानी  बेटों से भारत

मां की हैं आंचल भरी पड़ी

झांसी की रानी सी बेटी

गोद में जिनकी पली बढी

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अश्फाक रौशन सिंह से

आबाद गुलिस्तां है मेरा

सावरकर के बलिदानों से

आजाद हिन्दुस्तां है मेरा

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याद इन्हें करके अपनी

धरती भी नम हो जाती है

तिरंगा नत हो जाता है

हिमालय झुक जाती है

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आजाद नगर के रहवासी

ये याद रहे कुर्बानी

कर्जदार तुम हो उनके

हर सच्चा हिन्दुस्तानी

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उदय शंकर चौधरी नादान

पटोरी दरभंगा बिहार

7738559421

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