#Kavita by Unman

मीडिया

तुम ऐसे तो न थे

लोगों को और खुद को

जोड़ो न जोड़ो

लेकिन

यूँ तोड़ते तो न थे।

राष्ट्रवाद जगता था तुम्हारा

15 अगस्त, 26जनवरी आने पर

युद्ध हारने या जीत जाने पर

लेकिन

सालों भर यूँ उन्माद फैलाते तो न थे

सत्ता के आव भगत में

चुपचाप दिन बीतता था तुम्हारा

खाते और खिलाते तो थे तुम

लेकिन

खुलेआम डकारते तो न थे

बाबा और टोटकों पर

विश्वास तो था तुम्हारा

लेकिन

खुद बाबा तो बन जाते न थे

आग और पानी

तुम खूब दिखाते थे

लेकिन

खुद आग लगाते तो न थे

दिन भर बुदबुदाते

रात में बड़बड़ाते तो थे

लेकिन

दिन-रात यूँ चिल्लाते तो न थे।

मीडिया

तुम्हें क्या हो गया है

सोचो न, सोचो

तुम वैसे तो थे

लेकिन

ऐसे  न थे

हाँ, बिल्कुल ऐसे न थे।

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