#Kavita by Ved Pal Singh

मेरे मातपिता को संभाल जाना……………………..

अपनी शादी की बेला पर मैं तुम्हें बुलाती हूँ,
हाथ जोड़ विनती कर तुमको ये बतलाती हूँ।

यादों की बारात आएगी सपने भरे फेरे होंगे,
मैं किसी की हो जाऊँगी और कोई मेरे होंगे।

हँसियों की गूँज फैलेगी गीतों का राज होगा,
ढोलक की थाप पे घुँघरुओं का साज होगा।

रिवाजों की बेदी पर उसूलों की अग्नि होगी,
संस्कारी मंत्र होंगे ख़ुशियों की आहुति होगी।

रिश्तों की मेहंदी पर तमन्नाओं का रंग होगा,
वायदों की दावत में भावनाओं का जंग होगा।

आशाओं की हल्दी चढ़ी चाहतों में रंगी हुई,
मान्यताओं की चादर ओढ़े छुइमुई बनी हुई।

अग्नि के चारों ओर सुगम क़दम बढ़ाती हुई,
बचपन की मस्ती की भोली भेंट चढ़ाती हुई।

गृहस्थ की पाक राह पर अपने पैर रख दूँगी,
संवेदनाओं की गठरी अपने सर पर रख लूँगी।

मेरा हौसला बढ़ाने को सर पर हाथ रख देना,
मेरे भावी जीवन में अपना आशीर्वाद भर देना।

सानुरोध बुलावा है मेरी शादी में ज़रूर आना,
मेरी विदाई पे मेरे मातपिता को संभाल जाना।

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