#Kavita by Ved Pal Singh

ऐ ज़िन्दगी……………..

लो हम हो गए हवा पे सवार
छोड़के ज़मीं छोड़के घरबार
उड़ते रहें या कहीं नीचे गिरें
अब तो बस ये जाने करतार
ऐ ज़िन्दगी तू किधर को है
मेरी तलाश तो इधर को है
तेरा मायना था कहाँ को हैं
मेरा वजूद जो है यहाँ को है
तू बिखर जाती किस लिए
मैं तुझे जोड़ता किस लिए
मैं तुझे खो दूँ ये चाह नहीं
मुझे ना मिले परवाह नहीं
सफ़र अब कितना रह गया
बस पूरा हुआ और वो गया
अपनी आरज़ू तो समेट ली
मैंने जुस्तज़ू भी है लपेट ली
अब इस जहाँ से मैं बेज़ार हूँ
ना नाशाद हूँ ना बेक़रार हूँ
मैंने ख़त्म कर दी संजीदगी
अब मौत हो या रहे ज़िंदगी
इस जिस्म से ऊपर हो गया
मैं उसके ख़्याल में खो गया….।।

Leave a Reply

Your email address will not be published.