#Kavita by Ved Pal Singh

तुम हँस के टाल देते हो……………………..
मेरी शरारत को भी तुम हँस के टाल देते हो,
मुस्कुरा कर जैसे शय मात की चाल देते हो।
दिल के तुम कितने गहरे हम नाप नहीं पाते,
हम तुमसे दूर नही जाते तुम पास नहीं आते।
मगर हमें मन मर्ज़ी करने की मजाल देते हो,
मुस्कुरा कर जैसे शय मात की चाल देते हो।
नाराज़ हम होते हैं तो भी तुम शांत रहते हो,
हमारी बेअदबी को भी तुम चुपचाप सहते हो।
ग़ुस्से की बातों को तुम हँसी में ढाल देते हो,
मुस्कुरा कर जैसे शय मात की चाल देते हो।
अपना दर्द भी कभी किसी से नही कहते हो,
भावनाओं के बहाव में भी तुम नहीं बहते हो।
ख़ुश रहते हो ख़ुश रहने की मिसाल देते हो,
मुस्कुराकर जैसे शय मात की चाल देते हो।
गीता का निरलिप्त भाव कोई तुम से सीखे,
तुम्हें कृष्ण मान होकर सखा अर्जुन सरीखे।
तुम शांत भाव कर्म सीख बेमिसाल देते हो,
मुस्कुराकर जैसे शय मात की चाल देते हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published.