#Kavita by Ved Pal Singh

हर बात की हद होती है …………….

ज़िंदगी भरपूर जियो और कुछ भी करो,
मगर याद रखो हर बात की हद होती है।

किसी को बार बार रूलाओ या हँसाओ,
बहुत दुत्कारो या प्यार से पास बुलाओ।
किसी को तंग करने की भी हद होती है,
याद रखो कुछ भी करने की हद होती है।

नजर फेरो शूल घोंपो मत किसी सीने में,
भरो मत सैलाबे अश्क़ किसी के जीने में।
ज़िंदगी से खेलने की भी तो हद होती है,
याद रखो कुछ भी करने की हद होती है।

शिकायत करो न राज खोलो अपनो के,
कभी ना टुकड़े करो अपनों के सपनों के।
रिश्तों से खेलने की भी एक हद होती है,
याद रखो कुछ भी करने की हद होती है।

चाहे आँसू ना पोंछो ना कोई भरोसा दो,
मगर क़हर मारों के घावों को सहला दो।
इंसानियत से बेजारी की भी हद होती है,
याद रखो कुछ भी करने की हद होती है।

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