#Kavita by vinay kumar Samadhiya

” सजदा ए तहरीक ”

Message Body:
बख्सी है बड़ी न्यामत् ,
खुदा ने तह़राम ए सलीके से ,
हर लफ्ज़ ए फकत़ में ,
जैसे रमतीं हैं शोखियां,
किस तरह कर सकूँ में ,
सजदा ए तह़रीक ऐ खुदा ,
जिस्मानियों में जैसे ,
रंगत समायी है ,
मुल्क़ का हर जर्रा जर्रा ,
मुखातिब होने को बेताब है ,
तेरी इस नक्काशी ए बला के ,
रूमानी शबाब से ,
बड़ी फुर्सत का ख्वाब है ,
या कहूँ ,
ख्वाब ए फुर्सत इसे ,
संजोया गया है इसे ,
या कहूँ ,
पिरोया गया मनिका है ,
कहकसा है जिंदगी ,
फानूस सी कसक है ,
फिर भी ,
रूतबे जो देखे जनाब के ,
फरिश्ते भी गश खाए हुए हैं ,
नहीं है इल्म इस बात का ,
अंजाम ए शाम क्या होगा?
गुस्ताखियों का घटक भी ,
छलकने लगा है अब तो ।।
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शब्दार्थ-
1. तहराम ए सलीका – सूझ समझ से ,
2. लफ्ज ए फकत़ -बोलने की अदा
3. सजदा ए तहरीक-गुजारिस, फरियाद
4.नक्काशी ए बला -बेहद खूबसूरत
5.जिस्मानियों- शरीर के अंदर
5.फकत़ – अदा ।

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