#Kavita by Vinay shukla

तू चाहे तो इन आंखों पर
आंखों से पहरा कर दे
या फिर मन के भावों को
तू सागर सा गहरा कर दे !
लेकिन अन्तस में जो है
गीत बदल न पाऊँगा
चाहे लाख जतन कर ले तू
मीत बदल न पाऊँगा ।
रचनाकार -विनय शुक्ल

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