#Kavita by Vinay shukla

कभी रूठना कभी मनाना चलता है ये चलने दो
सुख दुख का है ताना बाना चलता है ये चलने दो
जीवन भी तो चलता है आकंठ न डूबो तुम इसमें
यहाँ लगा है आना जाना चलता है ये चलने दो ।

(2)
लोग कहते यहाँ मीत हो जाऊंगा
जग से हारा हूं मैं जीत हो जाऊंगा
कंठ से जो अपने लगाओगी तुम
स्वर हूं टूटा हुआ गीत हो जाऊंगा ।

( 3)
स्वयं से दूर   रहता हूं   तुम्हारे  पास
आने को
दिलों में राग सा  छाया  जुबां कहती है
गाने को
अभी मैं इस कदर झूमा हूं तेरे प्यार में गुलशन
तुम्हीं तुम हो मेरी धङकन समझ आया जमाने को ।

रचनाकार -विनय शुक्ला

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