#Kavita by yasmeen khan

क्षणिकाएँ

शब्द बह्म हैं

मुखरित होकर

भेद बतायें

दर्शन सँजोकर।

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सम्वेदना है

गहन विचारशैली

आंदोलित करे

तन , मन सहेली।

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अभिनय ऐसा

शर्मा जायें

ऑस्कर विजेता भी

गश खा जायें।

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हर भली बात

दिल को छूती है

भाव उकेरना भी

साहित्य आहुति है।

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