#Kavita by VISHWA VIJAY PRATAP

नारी प्रधान
नारी से है जग बना
नारी का सम्मान करें,

सारी हदों को पार करके ना
मत उनका अपमान करें,

पूछें धरती और अम्बर से
फिर अपनों पर विश्वास करें,

जग जननी है ये नारी
मत उनसे खिलवाड़ करें,

कष्ट पहुचें जिससे नारी को
ऐसा ना व्यवहार करें,

चंद रुपयों की खातिर
मत उनका व्यापार करें,

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