#Kavita byVishal Narayan

–” ओ भाई “–

ओ भाई,

मिठाई खा लो

आरती उतरवा लो

दोनों हाथों पे भरके

राखी भी बँधवा लो.

जीवन में आगे बढ़ो

नित फलो फूलो तुम

नयी नयी कलियों से

बाकी की रातें सजा लो.

ओ भाई , मिठाई खा लो….

चौक चौबारेे में

दिन के उजियारे में

जहाँ कहीं मौके मिले

किसी की इज्जत उठा लो

ओ भाई , मिठाई खा लो….

गर मन के कोने में

जरा भी शर्म बची हो

अपनी नजरें नीचे करके

और थोड़ा सा लजा लो

ओ भाई , मिठाई खा लो….

गर हो सके तो

और कुछ दे सको तो

कर जोड़ तुमसे माँगती हूँ

बहनों की इज्जत बचा लो

ओ भाई , मिठाई खा लो….

घर के ओबारे में

बाहर चौक चौबारे में

कहाँ नहीं डर लगता मुझको

अपने और सौ भाई बना लो

लो भाई , मिठाई खा लो….

✍–” विशाल नारायण ”

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