#Kavita by Chetanya Chetan

मॉ

््््

मुझको परियों के किस्से सुनाती थी मॉ

लोरियॉ गाके मुझको सुलाती थी मॉ

 

आप खुद गीले विस्तर पे लेटी रही

सूखे विस्तर पे मुझको लिटाती थी मॉ

 

लग न जाये कोई वदनजर इसलिए

मुझको काजल का टीका लगाती थी मॉ

 

टॉद पाने की जिद ठान लेता था तव

मुझको पानी मे चँदा दिखाती थी मॉ ।

 

मेरी जन्नत है पाप के कदमे तले

यह सबक रोज मुझको पढाती थी  मॉ

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