#Kavita By Dashrath Kumar Gupta

ऐ पाक कान खोल सुन

जिसे हमने पैदा किया आंख दिखा रहा,
सीख रणनीति हमसे उल्टा रणनीति सीखा रहा।
पैदा हमने किया फूल समझकर,
तैयार हुआ ये बबूल बनकर ।
अपने मां को ही मारने को भूत है सवार,
आज भी पीठ पर खंजर से किया वार।
जालिम अब मानचित्र में तेरा नहीं होगा स्थान।
रे कायर बुजदिल अब मिटेगा पाकिस्तान।
तूने मानवता को पिया धोकर,
तू भी मौत का तांडव मना रक्तांसू रोकर।
अंगार बन चुकी है अश्कों की धारा,
अब तू दिखेगा नहीं दुबारा।
तेरे चलते जो हमने गंवाये हैं जो बेटे,
तेरी हड्डी भी नहीं छोड़ेगी आग की लपेटें।
अब न तेरा गलती होगा माफ,
इस दुनिया से सिधा तू होगा साफ।
वीरों ने रंगों की जगह खून से खेली है जो होली,
भाई को तिरंगे में देख मुस्काती बहन है कितनी भोली।
हुआ कभी न आबाद न कभी आबाद होगा,
मेरे हाथों ही पाक तू बर्बाद होगा।
मोदी जी आदेश दे पूरा करो अपने वादों को,
सिर काट अलग करें भारत को मलिन करने वाले हरामजादों को।
दुनिया हकदार नहीं उसका कोई है और,
जम्मू-कश्मीर भी हमारा साथ में है लाहौर।
नभ में गर्व से घूम रहे उस मां के आंचल का करना हिफाजत,
जिस मां के शेर जैसै बेटे रणभूमि में दिये शहादत।

दशरथ कुमार गुप्ता बलरामपुर छत्तीसगढ़ मोबाइल नंबर 7697801182

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