#Kavita By Dashrath Kumar Gupta

– मां शारदा वंदना

तू तो है मां ज्ञान का सागर,
अज्ञान का छायी धरा पर बादल।
ज्ञान बिना दनुज हो रहा इंसान,
सबके मस्तिष्क में भर दो ज्ञान।
भूला इंसान सब नियम कायदा,
धर्म छोड़ रहा देखकर फायदा।
भूल गया अब तो मां बाप का आदर,
तू तो है मां ज्ञान का सागर।
हर घर दे रहा मां मौत दस्तक,
दिन पर दिन कट रहे मस्तक।
लाचार है मां दुखिया गरीब।
दो वक्त की रोटी भी नहीं नसीब।
ज्ञानप्रकाश फैला दो मां आकर,
तू तो है मां ज्ञान का सागर।
तेरी कृपा से मां मूर्ख भी विद्वान,
हुई मतिभ्रमित जिसके सिर सवार।
सुर नर मुनि सदा वंदिता,
ज्ञान फैला दो हे महाश्वेता।
धरा को ओढ़ा दे मां ज्ञान का चादर,
तू तो है मां ज्ञान का सागर।

दशरथ कुमार गुप्ता बलरामपुर छत्तीसगढ़ मोबाइल नंबर 7697801182

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