#Kavita by Devanand Saha Anand Amarpuri

तेरी आवाज से।।।।।।।

 

पास हैं हम पर,तेरी आवाज़ से दूर ।

कभी-कभी कितने,हम हो जाते मजबूर।।

 

क़ायल हैं हम ,तेरी गायिकी के  ;

रह नहीं सकते कभी,इससे हम दूर।।

 

मौशिकी तुम्हारी हो,हमेशा बुलन्दी पर;

दुआ करेंगे हम,ख़ुदा से भरपूर ।।

 

मयस्सर हो ज़माने की,सारी खुशियाँ;

गायिकी की दुनियाँ ,में हो मशहूर।।

 

लग जाये तुम्हें, मेरी उम्र   बांकी  ;

रखे ख़ुदा तुम्हे, क़यामत से बहुत दूर।।

 

बचाये बुरी नज़रों से,परवरदिगार ;

रखे जहाँ की हर,मुश्किलात से दूर।।

 

न रहे हद कोई,जिंदगी में”आनंद”की;

इल्तज़ा रहेगी मेरी,यही रब से भरपूर।।

 

देवानंद साहा”आनंद अमरपुरी”

 

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