#Kavita by Devesh Dixit

राष्ट्रीय एकता को समर्पित कविता।

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माहे रमज़ान में मालिक,यही है इल्तिजा तुझसे,

महीने साल के मौला सभी रमज़ान हो जायें ।

कहीं लश्कर कहीं आतंक या माओ का डर ना हो ,

बमों को फोड़ने वाले ,सभी रहमान हो जायें ।

न ही मंदिर पे हो हमला, न अब मस्जिद गिरे कोई

यहाँ पर एक मालिक की सभी संतान हो जायें।

दंगे हों न आपस में सियासत हो न मज़हब पर ,

सभी  फिरकापरस्ती  लोग अब  इंसान हो जायें।

हमारे हों  सभी अपने,नही हो ग़ैर अब कोई ।

सभी के दिल की धड़कन में यही ईमान हो जायें।

मिटें सब दूरियां औ फाँसले जो हो गये लम्बे।

अदावत को भुला हम प्यार की पहचान हो जायें।

हमारी ईद होली और दिवाली ‘देव’ हो ऐसी ,

मुसलमाँ फाग गायें, हिंदु के रमज़ान हो जायें ।

देवेश दीक्षित  9794778813

 

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