#Kavita by Dharmender Arora

हर तरफ़ हिंदी का ही गुणगान है!
देश की मेरे यही पहचान है!!

ये बड़ी उत्तम गुणी जन मानते!
लेखनी में फूंक देती जान है!!

नेक दिल बन सब शरण इसकी रहो!
प्यार से रखती सभी का मान है!!

रात-दिन इसका करे सत्कार जो!
आदमी पाता वही सम्मान है!!

वेद,तुलसी,सूर,मीरा की धरा!
इस पे हिंदी ईश का वरदान है!!

धर्मेन्द्र अरोड़ा
“मुसाफ़िर पानीपती”

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