#Kavita by Dharmender Arora Musafir

गीतिका

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रचना

मापनी:1222 1222 1222 1222
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बड़ी मीठी लगे सबको हमारी शान है हिंदी !
अनेकों गुण भरे इसमें गुणों की खान है हिंदी !!
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मधुर धारा बहा देती अगर तुम भीगना चाहो !
बजाये सुरमयी सरगम सुरीली तान है हिंदी !!
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सभी का दिल लुभा लेती दया सद्भाव से अपने !
भले हिंदू भले मुस्लिम सभी की जान है हिंदी !!
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महकती फूल सी हरदम चहकती बन सदा बुलबुल !
समर्पित भावनाओं का सुवासित गान है हिंदी !!
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यही अनुरोध करता हूँ लिखो मनभावनी भाषा !
रहो इसकी शरण में सब बढ़ाती मान है हिंदी !!
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धर्मेन्द्र अरोड़ा
“मुसाफ़िर पानीपती”

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