#Kavita by Dharmender Arora Musafir

*दवा से जो नहीँ होते*

दवा से जो नहीँ होते दुआ से काम होते हैं!
जहाँ में आज भी ऐसे करिश्मे आम होते हैं!!
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गलत राहों से जीवन में हमेशा दूर तुम रहना!
बुरे हर काम के देखो बुरे अंजाम होते हैं!!
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निराला सा चलन देखा जहाँ में आज लोगों का!
बगल में है छुरी रखतें जुबां पे  राम होते हैं!!
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दिलों में इस ज़माने के पनपती साज़िशें हरदम!
बशर की जान के तो बस ज़रा से दाम होते हैं!!
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समझते हैं कहाँ ज़ालिम हमारे दर्द को अब भी!
जो’हँस-हँस कर वो’ पीते हैं लहू के जाम होते हैं!!
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कहाँ मिलती है अहले-दिल को भी मंज़िल मुहब्बत की!
बशर तो प्यार की खातिर सदा बदनाम होते हैं!!
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बड़ी शातिर है ये दुनिया नहीँ काबिल  भरोसे के!
यहाँ किस्से फरेबों के तो’सुब्हो  -शाम होते हैं!!
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रखो किरदार की दौलत हमेशा ही ज़माने में!
समय के साथ जो चलते उन्हीं के नाम होते हैं!! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
मुसाफ़िर इस गज़ल में भी पते की बात को कहता!
भरोसा हो जिन्हें खुद पर नहीँ नाकाम होते हैं!!
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धर्मेन्द्र अरोड़ा’मुसाफ़िर’
9034376051

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