#Kavita By Dharmendra Kumar Saini

परिंदे को बचा दो
पर्व मनाओ प्यार से
झूम उठो त्योहार से
नववर्ष का प्रथम पावन पर्व
बच्चों की खुशियों का पर्व
बड़ो की उम्मीदों का पर्व
इस पर हम सभी को गर्व

आज मकर सक्रांति त्योहार है
किसी की जीत ,किसी की हार है
नीला आसमान भर गया है,
रंग बिरंगी पतंगों से
सभी के मन में उठी प्रफुल्लित
उमंगो से
ये काटा, वो काटा स्वर
गूँज उठा गगन में
सुबह सवेरे सब लग गये
अनचाही लगन में
जश्न मनाओ, जीत के
साथ में गाओ मीत के

बस इतनी विनती है
परिंदे बचा दो
कट ना जाये कोई तुम्हारी इस डोर से
परिवार उजड़े ना किसी का तुम्हारे शोर से
वो भी बच्चों की खातिर निकलते हैं घर से
वापस लौटेंगे या नही अनभिज्ञ इस डर से
छोटे नन्हें मुन्नों की कल्पना करके
ध्यान रखे उनका भी
आसमां खाली हो ,आओ पेंच लड़ाये
इंसान के साथ , परिंदे को भी बचाये

––धर्मेन्द्र कुमार सैनी ,बांदीकुई,दौसा(राज.)

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