#Kavita by Dinesh Pratap Singh

बलात्कार की निरंतर घटनाओं पर एक त्वरित टिप्पणी

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नारी पूजन में ,देवों का वास, जो देश बताता था

धरती नदियों तक को अपनी मां के तुल्य जताता था

उस देश के कुछ निर्लज़्ज़ों ने है किया काम शैतानों का

धूल में देश का मान मिला सिर झुका सभी इंसानों का

जो देश था वीर जवानों का

वहां अब डेरा हैवानों का।

जहां पर नारी की रक्षा में एक गीध प्राण दे देता है

वीर शिवा स्वराज की शिक्षा जीजा मां से लेता है

हिन्दू को बना बहन रक्षा का भार हुमायूँ लेता है

उस देश की कोख लजाने वाला कार्य है इन संतानों का

धूल में देश का मान मिला सिर झुका सभी इंसानों का

जो देश था वीर जवानों का

वहां अब डेरा हैवानों का।

लेकिन सत्ता के शिखरों की लापरवाही भी दोषी है

दलों में अपराधी ,गुंडों की वाहवाही भी दोषी है

और प्रशासन की ढुलमुल ये कार्यवाही भी दोषी है

कुम्भकर्ण कब जागेगा इन सत्ता के ऐवानों का

धूल में देश का मान मिला सिर झुका सभी इंसानों का

जो देश था वीर जवानों का

वहां अब डेरा हैवानों का।

“दिनेश प्रताप सिंह चौहान “

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