#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

अब तो सभी पुरानी चीजों से ही काम चलाएंगे

दोस्त हों या दुश्मन भी नए हमसे न बनाये जायेंगे

अज़ल से केवल प्रेम ही है वो जिसकी सत्ता कायम है

जंग दुश्मनी और ये नफ़रत कितने दिन टिक पाएंगे

उनकी किस्मत में तो सदा ही सूखी रोटी ही आयी

जो बेकार ज़मीर को खुद से दूर नहीं रख पाएंगे

अभी तो हम सबके प्यारे हैं और दोस्त हैं सभी यहां

चलो देखता हूँ क्या होगा जब शीशा दिखलायेंगे

पूछ रहे हैं सारे मुझसे कारण दुःख तकलीफों के

बता ज़िन्दगी किस किस को हम नाम तेरा बतलायेंगे

“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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