#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

जवाब अब इसका भी ज़रूरी है

ज़िन्दगी है कि ये मज़बूरी है

छीन बीनाई पूछा जाता है

ज़िन्दगी काली है या गोरी है

मौत का इंतज़ार करना है

ज़िन्दगी की ये सीनाजोरी है

कहने को सभी कुछ हमारा है

चलती पर किसी पे न मेरी है

ज़िन्दगी जी ली तो समझ आया

ज़िन्दगी मौत की मुंहबोली है

“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

 

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