#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“एक  अंतर्राष्ट्रीय व्यंग्य”

आरती अमरीका सर की ,जगत के आला अफसर की।

 

हैं काज़ी सारी दुनिया के ,हैड दुनिया के बनिया के

जिन्हें ये आतंकी कहते ,. उन्हीं को भर झोली देते

अजब है मति इनके सर की

आरती अमरीका सर की

तेल है इन्हें बहुत प्यारा ,न जाने कितनों को मारा

बहाना कोई बना लेंगे ,. धवल को स्याह बता देंगे

यू एन ओ है इनके घर की

आरती अमरीका सर की

जगत पर जो तोहमत धरते ,काम खुद वही रोज़ करते

कभी खुद बाज़ न आएंगे ,.. …  फटे में टांग अड़ायेंगे

खामखाँ बड़ी बुआ घर की

आरती अमरीका सर की

इन्हीं के खून का मानीं है ,और का खून तो पानी है

चोट पर खुद की हंगामा ,और की चोट सिर्फ ड्रामा

गज़ब हैं बन्दा परवर भी

आरती अमरीका  सर की

दिनेश प्रताप सिंह चौहान

 

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