#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

यूँ पानी की कमी न होती ,…. अगर आँख में पानी होता

सबकी आँख में नमीं न होती,अगर आँख में पानी होता।

बदले गद्दीनशीन,…………. लेकिन हाल हमारे वही रहे

जनता यूँ अनमनी न होती,…अगर आँख में पानी होता।

राजनीति का पतन देखिये ….. देशद्रोहियों को भी शह

ज़मीं ख़ून से सनी न होती ,…अगर आँख में पानी होता।

सही दासता सदियों की,… पर आत्मालोचन नहीं किया

हालत ऐसी बनी न होती,… . अगर आँख में पानी होता।

देश पटे लाशों से चाहे,………  गद्दी लेकिन मिल जाए

राम रहीम में ठनी न होती,.. अगर आँख में पानी होता।

इन्द्रासन जब हिलें,… युद्ध का दाँव सियासत खेलती है

सीमा पर सनसनी न होती,.. अगर आँख में पानी होता।

जाने क्या क्या बन जाते,….  इंसान नहीं बन पाते हम

इंसानों की कमी न होती,….. अगर आँख में पानी होता।

“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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